⚔️ Nagoji Mane — मराठा इतिहास का सबसे विवादास्पद विश्वासघात
जब 1696 में मराठा साम्राज्य औरंगजेब की विशाल मुगल सेना से अस्तित्व के संघर्ष में जूझ रहा था, तब एक सरदार ने ऐसा कृत्य किया जिसने राष्ट्र को स्तब्ध कर दिया — Nagoji Mane ने मराठा इतिहास के सबसे महान योद्धा संताजी घोरपड़े की हत्या कर दी। यह केवल एक व्यक्तिगत द्वेष नहीं था; यह राष्ट्रीय विपत्ति थी। संताजी, जिन्होंने सात वर्षों तक औरंगजेब को दक्षिण में विजय से रोका था, जिन्हें मुगल बादशाह ने “आंख का कांटा” कहा था, वे अपने ही साथी के हाथों मारे गए। यह लेख उस गहन ऐतिहासिक विश्लेषण को प्रस्तुत करता है जो विश्वासघात की उस घटना, Nagoji Mane की प्रेरणाओं, मराठा राज्य व्यवस्था की आंतरिक दरारों, और इस त्रासदी के दीर्घकालिक परिणामों को उजागर करता है — एक कहानी जो व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा, राजनीतिक ईर्ष्या और राष्ट्रीय हानि की मार्मिक गाथा है।
प्रस्तावना: मराठा इतिहास के सबसे विवादास्पद कृत्य का महत्व
मराठा इतिहास में कुछ घटनाएं संताजी घोरपड़े की 1696 की हत्या जितनी विवादास्पद और परिणामी हैं। परंतु इस त्रासदी को समझने के लिए, हमें हत्यारे Nagoji Mane को समझना आवश्यक है – एक सरदार जिसका नाम मराठा इतिहास में विश्वासघात का पर्याय बन गया। नागोजी माने की कहानी केवल एक व्यक्तिगत अपराध की नहीं है; यह मराठा राज्य व्यवस्था की आंतरिक दरारों, सरदारों के बीच प्रतिद्वंद्विता, व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और राजनीतिक ईर्ष्या की जटिल गतिशीलता को उजागर करती है।
संताजी घोरपड़े 1689 से 1696 तक छत्रपति राजाराम महाराज के सबसे प्रभावी सैन्य कमांडरों में से एक थे। औरंगजेब की विशाल मुगल सेना के विरुद्ध उनके गुरिल्ला अभियान इतने सफल थे कि मुगल बादशाह ने उन्हें पकड़ने के लिए विशाल पुरस्कार घोषित किए थे। जदुनाथ सरकार ने संताजी और धनाजी जाधव को “औरंगजेब की दोनों आंखों में कांटे” कहा है। परंतु 1696 में, Nagoji Mane ने व्यक्तिगत द्वेष के कारण संताजी की हत्या कर दी – एक कृत्य जिसने मराठा राज्य को गहरा आघात पहुंचाया और संभवतः मुगल युद्ध के पाठ्यक्रम को प्रभावित किया।

Nagoji Mane का ऐतिहासिक महत्व तीन कारणों से है। प्रथम, उनका कृत्य मराठा इतिहास के सबसे महान सैन्य नेताओं में से एक को समाप्त कर दिया, जिससे मुगल युद्ध प्रयास पर तत्काल प्रभाव पड़ा। द्वितीय, यह घटना मराठा राज्य व्यवस्था की एक गंभीर कमजोरी को प्रकट करती है – सरदारों के बीच आंतरिक प्रतिद्वंद्विता जो राज्य के हितों से ऊपर व्यक्तिगत द्वेष को रखती थी। तृतीय, नागोजी माने का भाग्य – विभिन्न अभिलेखों में अस्पष्ट और विवादित – मराठा न्याय प्रणाली और राजनीतिक संरक्षण के बारे में महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है।
यह लेख Nagoji Mane के जीवन, संताजी घोरपड़े के साथ उनकी प्रतिद्वंद्विता, हत्या की परिस्थितियां, और इस घटना के दीर्घकालिक परिणामों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह केवल एक अपराध की कहानी नहीं है; यह 17वीं शताब्दी के अंत में मराठा राजनीति की जटिलताओं का एक केस स्टडी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मराठा-मुगल युद्ध और आंतरिक संघर्ष (1689-1696)
Nagoji Mane के कृत्य को समझने के लिए, हमें 1689-1696 की अवधि के राजनीतिक और सैन्य संदर्भ को समझना होगा। 1689 में छत्रपति संभाजी महाराज को औरंगजेब ने पकड़कर अत्यंत क्रूरता से शहीद कर दिया। यह मराठा राज्य के लिए एक विनाशकारी आघात था। संभाजी के छोटे भाई राजाराम ने छत्रपति का पद संभाला, परंतु परिस्थितियाँ अत्यंत कठिन थीं। औरंगजेब स्वयं दक्षिण में था, दृढ़ संकल्पित कि वह मराठा शक्ति को पूर्णतः कुचल देगा।
इन कठिन परिस्थितियों में, छत्रपति राजाराम ने गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाई – छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रसिद्ध “गनिमी कावा” का पुनरुद्धार। इस रणनीति के दो मुख्य स्तंभ थे संताजी घोरपड़े और धनाजी जाधव। दोनों असाधारण सैन्य कमांडर थे जो तीव्र गति से हमले करते, मुगल रसद आपूर्ति काटते, और दुश्मन को कभी स्थिर नहीं होने देते थे।
परंतु यह सैन्य सफलता आंतरिक तनावों के बिना नहीं थी। मराठा सरदार व्यवस्था एक जटिल पदानुक्रम था जहां व्यक्तिगत गौरव, क्षेत्रीय नियंत्रण और छत्रपति का पक्ष अत्यधिक मूल्यवान थे। संताजी और धनाजी, यद्यपि दोनों प्रतिभाशाली थे, अक्सर एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते थे। जी.एस. सरदेसाई ने “न्यू हिस्ट्री ऑफ द मराठाज” में इस प्रतिद्वंद्विता का विस्तृत विवरण दिया है।

इसी संदर्भ में Nagoji Mane का उदय हुआ। वे एक मराठा सरदार थे जो संताजी घोरपड़े के सैन्य दल का हिस्सा थे। यह स्पष्ट नहीं है कि Nagoji Mane का मूल क्षेत्र कहां था या उनका पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या थी – ऐतिहासिक अभिलेख इस संबंध में अस्पष्ट हैं। जो स्पष्ट है वह यह कि 1690 के दशक के मध्य तक, नागोजी संताजी के करीबी सहयोगियों में थे, जो उन्हें संताजी की हत्या के लिए एक अवसर प्रदान करने वाला था।
1696 तक मराठा-मुगल युद्ध एक गतिरोध में था। मुगल मराठा किलों को पूर्णतः जीत नहीं सके थे, और मराठा मुगल सेना को निर्णायक रूप से हरा नहीं सके थे। परंतु संताजी और धनाजी के निरंतर हमले मुगलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे थे। औरंगजेब इससे अत्यधिक निराश था। इसी समय, मराठा शिविर में आंतरिक तनाव बढ़ रहे थे – और Nagoji Mane इसी तनाव का एक घातक अभिव्यक्ति बनने वाले थे।
Nagoji Mane की पृष्ठभूमि और संताजी के साथ संबंध
Nagoji Mane के प्रारंभिक जीवन के बारे में ऐतिहासिक अभिलेख अत्यंत सीमित हैं। उनका जन्म कब हुआ, उनका परिवार कौन था, और वे संताजी घोरपड़े के दल में कैसे शामिल हुए – ये सभी प्रश्न अधिकांशतः अनुत्तरित हैं। यह अपने आप में महत्वपूर्ण है: यह सुझाव देता है कि नागोजी माने एक बड़े या प्रतिष्ठित परिवार से नहीं थे। यदि वे होते, तो उनकी वंशावली संरक्षित होती।
जो हम जानते हैं वह यह है कि 1690 के दशक तक नागोजी संताजी घोरपड़े के सैन्य संगठन में एक अधिकारी थे। मराठा सैन्य व्यवस्था में, एक प्रमुख सेनापति जैसे संताजी के पास कई अधीनस्थ सरदार होते थे जो छोटी टुकड़ियों की कमान संभालते थे। नागोजी संभवतः इसी श्रेणी में थे – एक मध्यम स्तर का कमांडर जो संताजी के निर्देशों के तहत कार्य करता था।
ऐतिहासिक स्रोत सुझाव देते हैं कि Nagoji Mane और संताजी के बीच संबंध समय के साथ बिगड़ गए। विभिन्न कारण प्रस्तावित किए गए हैं:

व्यक्तिगत अपमान: कुछ अभिलेखों का सुझाव है कि संताजी ने Nagoji Mane को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया था, संभवतः किसी सैन्य विफलता या अनुशासनहीनता के लिए। मराठा समाज में, जहां व्यक्तिगत गौरव अत्यधिक मूल्यवान था, ऐसा अपमान गहरा द्वेष उत्पन्न कर सकता था।
पुरस्कार और मान्यता का विवाद: संभव है कि Nagoji Mane को लगा कि उनके सैन्य योगदान को पर्याप्त मान्यता नहीं मिल रही थी। संताजी को सारा श्रेय मिलता था, जबकि उनके अधीनस्थ अधिकारी अदृश्य रहते थे।
राजनीतिक महत्वाकांक्षा: यह भी संभव है कि Nagoji Mane अधिक स्वतंत्रता और शक्ति चाहते थे, जो संताजी की छाया में असंभव था।
जो भी कारण रहा हो, यह स्पष्ट है कि 1696 तक Nagoji Mane ने संताजी घोरपड़े के विरुद्ध हिंसा की योजना बनाई थी। यह निर्णय – एक सहयोगी सेनापति की हत्या करना, वह भी मुगल युद्ध के बीच में – मराठा हितों के विपरीत था। परंतु व्यक्तिगत द्वेष ने राष्ट्रीय हित को अधिक्रमित कर दिया।
हत्या की घटना: 1696 का दुखद दिन
1696 में संताजी घोरपड़े की हत्या की सटीक तारीख और स्थान विभिन्न स्रोतों में कुछ भिन्न है, परंतु मूल कथा सुसंगत है। संताजी अपने सैन्य शिविर में थे, संभवतः कर्नाटक या महाराष्ट्र में, जब Nagoji Mane ने उन पर हमला किया।
जदुनाथ सरकार के विवरण के अनुसार, Nagoji Mane ने संताजी पर अचानक हमला किया – संभवतः जब संताजी असुरक्षित थे या अपने तंबू में थे। हत्या का तरीका विश्वासघात का था; यह खुला युद्ध नहीं था बल्कि एक गुप्त हमला था। संताजी, यद्यपि एक महान योद्धा थे, इस अप्रत्याशित हमले से बच नहीं सके।
इस हत्या के तत्काल परिणाम विनाशकारी थे। संताजी के सैनिक स्तब्ध और क्रोधित थे। Nagoji Mane को तुरंत पकड़ लिया गया – यद्यपि कुछ विवरण सुझाते हैं कि वे भागने का प्रयास कर रहे थे। संताजी के शिविर में अराजकता फैल गई। एक महान नेता की अचानक हानि ने सैन्य संगठन को अस्थायी रूप से पंगु बना दिया।

छत्रपति राजाराम और मराठा दरबार को जब यह समाचार मिला, तो यह एक राष्ट्रीय त्रासदी के रूप में देखा गया। संताजी केवल एक सैन्य कमांडर नहीं थे; वे मराठा प्रतिरोध के प्रतीक थे। उनकी हानि मुगलों के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक लाभ थी। औरंगजेब, जब उसे यह समाचार मिला, को निश्चित रूप से राहत मिली होगी।
Nagoji Mane के भाग्य के बारे में ऐतिहासिक स्रोत विभाजित हैं। कुछ विवरण सुझाते हैं कि उसे तुरंत मार दिया गया – संभवतः संताजी के क्रोधित सैनिकों द्वारा, औपचारिक परीक्षण के बिना। अन्य स्रोत सुझाते हैं कि उसे छत्रपति के दरबार में लाया गया, जहां उसे मृत्युदंड दिया गया। एक तीसरा, अधिक विवादास्पद दृष्टिकोण यह है कि Nagoji Mane को किसी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था और वह पूर्ण दंड से बच गया – यद्यपि यह दृष्टिकोण कम विश्वसनीय प्रतीत होता है।
राजनीतिक और सैन्य परिणाम: संताजी की हानि का प्रभाव
संताजी घोरपड़े की हत्या के परिणाम तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों थे। तात्कालिक रूप से, मराठा सैन्य प्रयास कमजोर हो गया। संताजी के नेतृत्व में जो टुकड़ियां थीं, उन्हें पुनर्गठित करना पड़ा। धनाजी जाधव, जो अब मुख्य सैन्य कमांडर बन गए, को अधिक जिम्मेदारी वहन करनी पड़ी। परंतु धनाजी, यद्यपि सक्षम थे, संताजी की अद्वितीय सामरिक प्रतिभा की पूर्ति नहीं कर सकते थे।
मुगलों ने इस अवसर का लाभ उठाने का प्रयास किया। औरंगजेब के सेनापतियों ने आक्रामक अभियान शुरू किए, यह आशा करते हुए कि संताजी की हानि ने मराठा प्रतिरोध को कमजोर कर दिया है। वास्तव में, अगले कुछ महीनों में मुगलों को कुछ सफलता मिली।

परंतु दीर्घकालिक रूप से, मराठा प्रतिरोध जीवित रहा। 1700 में छत्रपति राजाराम की मृत्यु के पश्चात, उनकी विधवा ताराबाई ने नेतृत्व संभाला और युद्ध जारी रखा। 1707 में औरंगजेब की मृत्यु के साथ, मुगल साम्राज्य का पतन शुरू हो गया, और मराठा शक्ति का उदय निर्बाध हो गया।
Nagoji Mane के कृत्य का एक अन्य परिणाम मराठा राज्य व्यवस्था में सुधार के प्रयास थे। यह स्पष्ट हो गया था कि सरदारों के बीच व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता राज्य के लिए खतरनाक थी। बाद के छत्रपतियों और पेशवाओं ने अनुशासन और केंद्रीय नियंत्रण को मजबूत करने का प्रयास किया। छत्रपति शाहू महाराज, जो 1707 में सत्ता में आए, ने विशेष रूप से सरदारों के बीच विवादों को सुलझाने और आंतरिक संघर्ष को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया।
ऐतिहासिक विश्लेषण: इतिहासकारों का दृष्टिकोण और विवाद
Nagoji Mane और संताजी घोरपड़े की हत्या पर इतिहासकारों के विभिन्न दृष्टिकोण हैं। जदुनाथ सरकार ने इस घटना को मराठा इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक के रूप में वर्णित किया है। उनके अनुसार, यह एक व्यक्तिगत द्वेष का मामला था जो राष्ट्रीय त्रासदी में परिवर्तित हो गया।
जी.एस. सरदेसाई ने अधिक संरचनात्मक विश्लेषण प्रदान किया है। उनका तर्क है कि संताजी की हत्या मराठा राज्य व्यवस्था की एक गहरी समस्या को प्रकट करती है – सरदारों की अत्यधिक स्वायत्तता और केंद्रीय अनुशासन की कमी। सरदेसाई के अनुसार, यह केवल नागोजी का अपराध नहीं था; यह एक व्यवस्था की विफलता थी जो ऐसे कृत्य को संभव बनाती थी।
स्टीवर्ट गॉर्डन ने “द मराठाज 1600-1818” में इस घटना को व्यापक मराठा राजनीति के संदर्भ में रखा है। उनका सुझाव है कि 1690 के दशक में मराठा शिविर में कई प्रतिस्पर्धी गुट थे, और संताजी की हत्या इन गुटबाजियों का एक अभिव्यक्ति हो सकती है।

एक विवादास्पद प्रश्न यह है कि क्या नागोजी को किसी अन्य शक्तिशाली सरदार या यहां तक कि मुगलों का गुप्त समर्थन था। कुछ इतिहासकारों ने अटकलें लगाई हैं कि Nagoji Mane की हत्या का समय संदिग्ध था – यह मुगलों के लिए अत्यधिक सुविधाजनक था। परंतु इस सिद्धांत के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं है।
एक अन्य बहस Nagoji Mane के भाग्य के बारे में है। कुछ स्रोत दावा करते हैं कि उसे तुरंत मार दिया गया, जबकि अन्य सुझाव देते हैं कि उसे कुछ प्रकार का राजनीतिक संरक्षण मिला। यदि बाद वाला सत्य है, तो यह मराठा न्याय प्रणाली और शक्तिशाली सरदारों की प्रतिरक्षा के बारे में गंभीर प्रश्न उठाता है।
विरासत और दीर्घकालिक प्रभाव
Nagoji Mane की “विरासत” नकारात्मक है – उनका नाम मराठा इतिहास में विश्वासघात और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के खतरों का प्रतीक बन गया। परंतु इस घटना के कुछ दीर्घकालिक प्रभाव थे जो मराठा राज्य व्यवस्था को आकार देने में महत्वपूर्ण थे।
प्रथम, संताजी की हत्या ने यह स्पष्ट कर दिया कि आंतरिक अनुशासन और सरदारों के बीच विवाद समाधान तंत्र आवश्यक थे। बाद के दशकों में, विशेषकर छत्रपति शाहू और पेशवा बालाजी विश्वनाथ के शासनकाल में, सरदारों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए अधिक संरचित प्रक्रियाएं विकसित की गईं।

द्वितीय, यह घटना घोरपड़े परिवार के लिए एक स्थायी त्रासदी थी। संताजी के पुत्र – पिराजी और राणोजी – को अपने पिता की विरासत के साथ जीना पड़ा, लेकिन उनकी अचानक और हिंसक मृत्यु का आघात भी वहन करना पड़ा। फिर भी, घोरपड़े परिवार ने अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखी और बाद के दशकों में कोल्हापुर राज्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
तृतीय, संताजी की हत्या ने मराठा लोक स्मृति में एक स्थायी छाप छोड़ी। आज भी, महाराष्ट्र में लोकगीत और कहानियां हैं जो संताजी की वीरता और Nagoji Mane के विश्वासघात को याद करती हैं। यह घटना एक नैतिक कथा बन गई है – व्यक्तिगत द्वेष राष्ट्रीय हित को कैसे नुकसान पहुंचा सकता है।
लेखक (Abhishek)की टिप्पणी: इतिहास के अध्येता का चिंतन
इतिहास के अध्येता के रूप में, मुझे Nagoji Mane की कहानी विशेष रूप से कष्टदायक लगती है – न केवल इसलिए कि यह एक महान नेता की हानि का वृत्तांत है, बल्कि इसलिए भी कि यह मानवीय कमजोरियों की शक्ति को दर्शाती है। Nagoji Mane संभवतः एक सक्षम सैन्य अधिकारी थे। यदि वे नहीं होते, तो संताजी उन्हें अपने संगठन में नहीं रखते। परंतु व्यक्तिगत ईर्ष्या, आहत गौरव, या महत्वाकांक्षा ने उन्हें एक ऐसे कृत्य की ओर धकेल दिया जो न केवल अनैतिक था, बल्कि राजनीतिक रूप से भी विनाशकारी था।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि इतिहास केवल बड़ी राजनीतिक और सैन्य शक्तियों का खेल नहीं है। यह व्यक्तिगत निर्णयों, भावनाओं और संबंधों का भी इतिहास है। Nagoji Mane और संताजी के बीच जो भी हुआ – चाहे वह एक सार्वजनिक अपमान हो, एक विवादित पुरस्कार हो, या केवल संचित कड़वाहट हो – यह एक राष्ट्रीय त्रासदी में परिवर्तित हो गया। यह हमें सिखाता है कि नेतृत्व में भावनात्मक बुद्धिमत्ता और संघर्ष समाधान कौशल उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने सामरिक प्रतिभा।

एक और पहलू जो मुझे प्रभावित करता है वह है ऐतिहासिक स्मृति की चयनात्मक प्रकृति। संताजी घोरपड़े को एक नायक के रूप में याद किया जाता है – उचित रूप से। परंतु Nagoji Mane लगभग पूर्णतः उनके एक कृत्य के लिए परिभाषित हैं। हम उनके जीवन के बारे में, उनकी प्रेरणाओं के बारे में, या उनके अपने संघर्षों के बारे में बहुत कम जानते हैं। यह इतिहासकारों के लिए एक अनुस्मारक है कि हमें “खलनायकों” को भी समझने का प्रयास करना चाहिए, न केवल उनकी निंदा करनी चाहिए।
अंततः, Nagoji Mane की कहानी एक चेतावनी है। यह दर्शाती है कि कैसे व्यक्तिगत विफलताएं – चाहे वे नेतृत्व में हों (संताजी ने संभवतः Nagoji Mane को अलग कर दिया) या अनुयायिता में (नागोजी की हिंसक प्रतिक्रिया) – व्यापक ऐतिहासिक परिणाम उत्पन्न कर सकती हैं। यह मराठा इतिहास की एक दुखद अध्याय है, परंतु यह हमें मानवीय प्रकृति और राजनीतिक संगठन के बारे में महत्वपूर्ण सबक सिखाती है।
स्रोत और संदर्भ
प्राथमिक और द्वितीयक स्रोत
- Sarkar, Jadunath – History of Aurangzib, Volume 5 (1920), M.C. Sarkar & Sons, Calcutta
- संताजी घोरपड़े के सैन्य अभियानों और उनकी हत्या का सबसे विस्तृत विवरण
- Sardesai, G.S. – New History of the Marathas, Volume 1 (1946), Phoenix Publications, Bombay
- मराठा राज्य व्यवस्था और सरदारों के बीच संबंधों पर गहन विश्लेषण
- Gordon, Stewart – The Marathas 1600-1818 (1993), Cambridge University Press
- मराठा राजनीति की संरचनात्मक समस्याओं पर आधुनिक विद्वतापूर्ण परिप्रेक्ष्य
- Duff, James Grant – History of the Mahrattas, Volume 1 (1826), Longman, London
- प्रारंभिक ब्रिटिश इतिहासकार का विवरण, समकालीन मौखिक परंपराओं पर आधारित
- Kincaid, C.A. and Parasnis, D.B. – A History of the Maratha People, Volume 2 (1918), Oxford University Press
- मराठा सैन्य संगठन और सरदार संबंधों पर संदर्भ
- Sen, Surendra Nath – The Military System of the Marathas (1928), Government of India Press
- मराठा सैन्य संरचना और कमांड पदानुक्रम पर विशेषज्ञ विश्लेषण
- Maharashtra State Gazetteers – विभिन्न जिला गजेटियर
- स्थानीय इतिहास और मौखिक परंपराओं पर जानकारी
FAQ — Nagoji Mane
प्रश्न 1: यदि Nagoji Mane ने संताजी घोरपड़े की हत्या नहीं की होती, तो क्या मराठा 1707 से पहले ही औरंगजेब को दक्षिण से खदेड़ सकते थे? या संताजी की जीवित उपस्थिति मराठा इतिहास को कैसे बदल देती?
उत्तर: यह एक गहन प्रतिकारात्मक (counterfactual) प्रश्न है जो हमें व्यक्तिगत प्रतिभा बनाम संरचनात्मक सीमाओं के बीच के संबंध को समझने के लिए मजबूर करता है। संक्षिप्त उत्तर: संभवतः नहीं – लेकिन मराठा स्थिति निश्चित रूप से बेहतर होती। 1696 में संताजी की मृत्यु के समय, औरंगजेब के पास अभी भी विशाल संसाधन थे – लाखों सैनिक, असीमित खजाना, और पूरे साम्राज्य का समर्थन। संताजी की प्रतिभा गुरिल्ला युद्ध में थी, निर्णायक विजय में नहीं। वे मुगलों को हरा नहीं सकते थे; वे केवल उन्हें थका सकते थे। परंतु – और यह महत्वपूर्ण है – यदि संताजी 1696 से 1707 तक (औरंगजेब की मृत्यु तक) जीवित रहते, तो तीन महत्वपूर्ण परिवर्तन होते: (1) मुगल क्षय में त्वरण: संताजी और धनाजी की संयुक्त गुरिल्ला रणनीति मुगल सेना को और तेजी से थकाती, मुगल खजाने को और तेजी से खाली करती। 1700-1707 की अवधि में मुगल हताशा चरम पर पहुंच जाती। (2) मराठा आत्मविश्वास और संगठन: संताजी की निरंतर उपस्थिति मराठा मनोबल को उच्च रखती। 1700 में राजाराम की मृत्यु के बाद का राजनीतिक संक्रमण (ताराबाई का शासन) अधिक स्थिर होता क्योंकि एक प्रतिष्ठित सैन्य नेता मौजूद होता। (3) 1707 के बाद मराठा स्थिति: जब औरंगजेब की मृत्यु हुई, मराठा विस्तार के लिए तैयार होते – और संताजी (तब 47 वर्ष के) एक अनुभवी सलाहकार के रूप में अगली पीढ़ी – बाजीराव, चिमाजी अप्पा – को मार्गदर्शन दे सकते थे। परंतु मूलभूत समीकरण नहीं बदलता: औरंगजेब को हराना संरचनात्मक रूप से असंभव था जब तक वह जीवित था। संताजी की असली विरासत समय खरीदना था – और यदि वे 1707 तक जीवित रहते, तो उस “खरीदे गए समय” में मराठा शक्ति अधिक मजबूत और संगठित होती। 1707 के बाद का मराठा विस्तार—जो वास्तव में हुआ—और भी तेज और प्रभावी होता।
प्रश्न 2: ऐतिहासिक स्रोतों में Nagoji Mane के भाग्य में इतनी असंगति क्यों है? क्या यह संभव है कि उन्हें वास्तव में कभी दंडित नहीं किया गया, और यदि हां, तो किसने उन्हें बचाया और क्यों? यह मराठा न्याय प्रणाली के बारे में क्या बताता है?
उत्तर: यह प्रश्न मराठा इतिहासलेखन की एक असहज सच्चाई को उजागर करता है। विभिन्न स्रोतों में नागोजी माने के भाग्य के तीन अलग-अलग संस्करण मिलते हैं: (1) उन्हें संताजी के क्रोधित सैनिकों ने तुरंत मार दिया; (2) उन्हें छत्रपति राजाराम के दरबार में लाया गया और वहां मृत्युदंड दिया गया; (3) वे किसी प्रकार से बच गए या हल्के दंड से छूट गए। यह असंगति संयोग नहीं है – यह तीन संभावनाओं का संकेत है। संभावना A: जानबूझकर अस्पष्टता: यदि नागोजी को वास्तव में किसी शक्तिशाली संरक्षक का समर्थन था – संभवतः धनाजी जाधव, जो संताजी के प्रतिद्वंद्वी थे, या कोई अन्य प्रमुख सरदार – तो उसके भाग्य को जानबूझकर अस्पष्ट रखा गया होगा। यदि यह ज्ञात होता कि एक संरक्षक ने एक हत्यारे को बचाया, तो यह राजनीतिक रूप से विनाशकारी होता। इसलिए “वह मारा गया” की कहानी प्रचारित की गई, जबकि वास्तव में वह गुमनामी में जीवित रहा। संभावना B: तात्कालिक सैन्य न्याय बनाम औपचारिक न्याय: संभव है कि संताजी के सैनिकों ने तुरंत नागोजी को मारने का प्रयास किया, लेकिन अन्य अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। फिर उसे राजाराम के दरबार में भेजा गया, परंतु वहां राजनीतिक विचारों ने हस्तक्षेप किया। शायद राजाराम को अन्य सरदारों को अलग नहीं करना था, या नागोजी के पास कुछ महत्वपूर्ण जानकारी या संबंध थे। संभावना C: दस्तावेजी अव्यवस्था: 1696-1700 अत्यधिक अराजक काल था। मराठा दरबार निरंतर घूम रहा था, मुगलों से भाग रहा था। दस्तावेज़ीकरण अपूर्ण था। विभिन्न कथाएं मौखिक परंपराओं से आईं, जो समय के साथ विकृत हो गईं। यह क्या बताता है: यदि नागोजी वास्तव में पूर्ण दंड से बच गया, तो यह दर्शाता है कि मराठा न्याय प्रणाली राजनीतिक विचारों से प्रभावित थी। छत्रपति की शक्ति पूर्ण नहीं थी; वह शक्तिशाली सरदारों पर निर्भर था। यदि एक सरदार ने नागोजी का संरक्षण किया, तो राजाराम को समझौता करना पड़ा। यह मराठा राज्य की एक संरचनात्मक कमजोरी थी जो बाद में – शाहू और पेशवाओं के शासनकाल में – सुधारी जाने की कोशिश की गई।
प्रश्न 3: संताजी घोरपड़े की हत्या के बाद धनाजी जाधव की मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक स्थिति क्या थी? क्या वे राहत महसूस करते थे कि उनका मुख्य प्रतिद्वंद्वी समाप्त हो गया, या अपराध-बोध कि उन्होंने एक सहयोगी को खो दिया? और क्या इस घटना ने उनकी नेतृत्व शैली को प्रभावित किया?
उत्तर: यह प्रश्न इतिहास के सबसे जटिल मनोवैज्ञानिक क्षणों में से एक को छूता है – जब आपका प्रतिद्वंद्वी त्रासदी में मर जाता है। धनाजी जाधव और संताजी घोरपड़े दोनों छत्रपति राजाराम के प्रमुख सेनापति थे, और वे अक्सर एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते थे – सम्मान, पुरस्कार, और छत्रपति का पक्ष के लिए। जी.एस. सरदेसाई और अन्य इतिहासकारों ने इस प्रतिद्वंद्विता को दर्ज किया है। संताजी की मृत्यु के बाद धनाजी की संभावित मनोवैज्ञानिक स्थिति: (1) तात्कालिक सदमा और अविश्वास: चाहे वे प्रतिद्वंद्वी थे, लेकिन वे एक ही युद्ध में, एक ही पक्ष पर लड़ रहे थे। संताजी की हिंसक मृत्यु – वह भी विश्वासघात से – धनाजी के लिए सदमे की बात रही होगी। यह एक याद दिलाता है कि सबसे बड़ा खतरा हमेशा मुगल नहीं, बल्कि आंतरिक द्वेष हो सकता है। (2) राजनीतिक अवसर का बोझ: संताजी की मृत्यु ने धनाजी को एकमात्र प्रमुख सैन्य कमांडर बना दिया। यह एक विशाल अवसर था – अब सारा सैन्य सम्मान और शक्ति उनका था। परंतु यह एक भारी बोझ भी था। पहले, यदि कोई सैन्य असफलता होती, तो दोष साझा किया जा सकता था। अब सारी जिम्मेदारी धनाजी की थी। (3) संभावित अपराध-बोध या आत्म-संदेह: यदि धनाजी और संताजी के बीच प्रतिद्वंद्विता सार्वजनिक रूप से ज्ञात थी, तो कुछ लोगों ने शायद यह अटकल लगाई हो कि धनाजी ने किसी प्रकार से नागोजी को प्रोत्साहित किया (यद्यपि इसका कोई साक्ष्य नहीं है)। धनाजी को इन अटकलों के साथ जीना पड़ा होगा। धनाजी के नेतृत्व पर प्रभाव (1696-1708): ऐतिहासिक अभिलेख सुझाते हैं कि संताजी की मृत्यु के बाद धनाजी अधिक सतर्क और कम आक्रामक हो गए। संताजी की गुरिल्ला शैली अत्यधिक साहसिक थी – तीव्र, अप्रत्याशित हमले। धनाजी अधिक रणनीतिक और रक्षात्मक थे। यह आंशिक रूप से उनके स्वभाव का प्रतिबिंबन हो सकता है, लेकिन यह भी संभव है कि संताजी की त्रासदी ने उन्हें सिखाया कि अति-आक्रामकता जोखिम लाती है – न केवल युद्धभूमि में, बल्कि राजनीतिक रूप से भी। धनाजी ने अपने शेष कैरियर में अधिक सहयोगी, कम प्रतिद्वंद्वी बनने का प्रयास किया। उन्होंने 1708 में छत्रपति शाहू की रिहाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शायद संताजी की मृत्यु ने धनाजी को यह सिखाया कि एकता विभाजन से अधिक महत्वपूर्ण है, और यह सबक मराठा राज्य के लिए मूल्यवान साबित हुआ।
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⚔️ Nagoji Mane और मराठा इतिहास का सबसे विवादास्पद विश्वासघात
यह लेख मराठा सैन्य नेतृत्व, आंतरिक राजनीति और संताजी घोरपड़े की विरासत पर आधारित हमारी शोध-श्रृंखला का हिस्सा है। Nagoji Mane द्वारा संताजी की हत्या, 1690 के दशक में मराठा-मुगल युद्ध और सरदारों के बीच प्रतिद्वंद्विता को गहराई से समझने के लिए नीचे दिए गए आंतरिक और विश्वसनीय बाहरी स्रोत देखें।
HistoryVerse7 — प्रामाणिक शोध • भूला हुआ इतिहास • सत्य की खोज
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